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दलित, शोषित स्त्रियों को न्‍याय दिलाने, उन्‍हें आत्‍मसंपन्‍न बनाने, आत्‍मनिर्भरता का पाठ पढ़ाने की दिशा में उत्‍तर प्रदेशीय महिला मंच पिछले पच्‍चीस वर्षों से जुटा है। देश की आधी आबादी को दोयम दर्जे की नागरिकता से मुक्ति दिलाने के लिए भी ‘मंच’ संकल्‍पबद्ध है। मंच का सपना है- आत्‍मचैतन्‍य। यानी प्रत्‍येक स्‍त्री अपनी प्रताडि़ता बहिनों के लिए स्‍वयं चेतना मशाल बने। स्‍त्री चेतना की एक ऐसी एकजुटता, जिससे स्त्रियां ऊर्जा ग्रहण कर अपने सीमित संसाधनों से ही जरूरतमंद स्त्रियों की समस्‍याओं का निदान कर सकें।

उत्‍तर प्रदेशीय महिला मंच नारी सशक्तिकरण के लिए सतत संघर्षशील है और इसी उद्देश्‍य की पूर्ति के लिए ‘मंच’ महिलाओं के जी‍विकोपार्जन के लिए विभिन्‍न स्रोत्रों की खोज तथा उनकी स्‍थापना करने, असहायों की सहायता करने, सामाजिक कु‍रीतियों को समाप्‍त करने, महिलाओं की सामाजिक-सांस्‍कृतिक उन्‍नति के उपाय करने और उनकी छिपी प्रतिभाओं को उजागर करने की दिशा में अपने विनम्र प्रयास जारी रखता है।

लिंगभेद को समाप्‍त करने के लिए उत्‍तर प्रदेशीय महिला मंच ने कई कार्यक्रम शुरू किए हैं जिनमें से कन्‍या को जन्‍म देने वाली माताओं का सम्‍मान भ्रूण हत्‍या जैसी कुरीति के खिलाफ चेतना जागृत करता है। मंच प्रत्‍येक वर्ष ऐसी महिलाओं को भी सम्‍मानित करता है जिन्‍होंने विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष कर एक मुकाम हासिल किया हो। सुविधाओं की रेखा से नीचे रहने वाले लोगों के लिए समय-समय पर अनौपचारिक शिक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य शिविर आयोजित करने के साथ उत्‍तर प्रदेशीय महिला मंच के विभिन्‍न सामाजिक-सांस्‍कृतिक कार्यक्रम न केवल महिलाओं में आत्‍मविश्‍वास पैदा करते हैं बल्कि उनके समग्र विकास की एक कड़ी भी हैं।

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